Thursday, September 13, 2007

तमन्ना



रात भर दीदाये नम नाक में लहराते रहे
साँस कि तर्हे से आप आते रहे जाते रहे

शब के जागें हुए तारों को भी नींद आने लगी
आप के आने कि एक आस थी अब जाने लगी

खुश थे हम अपनी तमन्नाओं का ख़्वाब आएगा
नजरें नीची किये शरमाये हुए आएगा
काकुले चहरे पे बिखराये हुए आएगा

पट्टियां खाद्की तो हम समझे के आप आ ही गए
सजदे मस्जूग के माबूद को हम पा ही गए

No comments: